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08/11/2015

मिट्टी के दिये #changingdiwali



वोह गेरू  के रंग से रंगी दीवार, गेंदे के फूलों की  माला, आम के पत्तो की तोरन… 
आज दिवाली के लिए खील खिलोने, लक्ष्मी गणेश की मूर्ति, मिठाई, रंगीले दिए ले आये हैं...
थोड़ी देर तक तो उत्साह रहा...
लेकिन फिर वही पुराने समय की बाट जोहना शुरू...
नहीं भूल पा रहे वहां की यादें, दादी बाबा, भाई बहन का लड़ना, पापा मम्मी का डांटना...
वोह गेरू के रंग से रंगी दीवार, गेंदे के फूलों की माला, आम के पत्तो की तोरन…
वोह पहला छोटा घर, बचपन का बिछोना, छत के पटाखे, मिट्टी के दिये और गिनती की फुलझड़ी, अनार ...
कब तक फ़ोन पे करे बातें, भेजें कीमती उपहार ?
कोई बात दो जरा सा कहाँ से लाएं विदेश में अपनों का साथ, पुरानी गड्ढे  वाली गलियां, गालियां और प्यार ?

आपकी दिवाली अपनों के साथ मंगलमय बीते , मौका मिले तो हमारी तरफ से शुद्ध देसी घी के बढ़िया वाले मोती चूर के लड्डू अवश्य खा लीजो लाला रे ! 

15/07/2014

नानी ओ नानी, सुनो मेरी कहानी / Nani O Nani, Suno Meri Kahani

When wife's parents visit during SALE SALE SALE, the husband is not happy specifically or generally, whichever ways. All they could see is wrong timing and a big credit card bill. Because now they have to match the standards of their father-in-law, be it managing chores, shopping, traveling, knowledge about finance, share market, current affairs etc etc.

On top of that, a shopaholic wife and mother-in-law !
Inspired from one such extravagant evening to a mall, dedicating this poem on behalf of my daughter to her Naani and plight of a husband, father and son-in-law under pressure.


Sanvi's first hand bag, gifted by her Naani when
she was just 4 months, March 2013.
नानी ओ नानी
सुनो मेरी कहानी

यह जो आपकी है ना, बिटिया पुरानी
खुद को समझे बड़ी सयानी
लो, कल का ही किस्सा सुनती हूँ
फिर मत कहना, ख़ामख़ा मैं गप्पे लड़ाती हूँ

आपने मन की सयानी
सुबह पढ़  रही थी, पेज ३ के इश्तिहार
पढ़ के हो गई एकदम क्रेजी
बिलकुल रेडी जाने को तैयार

फटाफटी बना लिया शौपिंग का प्लान
बोली डैडी जी को कर लीजिये ना आज
वर्क फ्रॉम होम
बाहर जाने का हो रहा है बहुतै मन

13/06/2014

दादी माँ बनाती थी रोटी/ Dadi Maa Banati Thi Roti

Jo Mile Usmain, Kaat Lenge Hum,
Thodi Khushiyaan, Thode Aanson Baant Lenge Hum-
Lyrics of "Muskurane Ki Vajah Tum Ho"

Movie City Lights (Must Watch)
I don't know who the author is. Who so ever is written this, its so true. And the hangover of the movie CityLights make me love this poem even more.

दादी माँ बनाती थी रोटी,
पहली गाय की ,
आखरी कुत्ते की
एक बामणी दादी की


एक मेथरानी बाई
हर सुबह सांड आ जाता था
दरवाज़े पर गुड़ की डली के लिए
कबूतर का चुग्गा

16/04/2014

किसी से कहना मत / Kisi Se Kehna Mat (NaMo)



अरविंद जी आपने तो कर दिया प्रूफ़ 
आप हैं सबसे बड़े पॉलिटिकल स्पूफ 

आप मेरी माने तो,

07/03/2014

उम्मीद का एक टुकड़ा / Umeed Ka Ek Tukda

Image Courtesy : Happy World
आज उम्मीद का एक टुकड़ा खा के देखिये तो सही,
आशा को निराशा से जीता के देखिये तो सही