07/03/2014

उम्मीद का एक टुकड़ा / Umeed Ka Ek Tukda

Image Courtesy : Happy World
आज उम्मीद का एक टुकड़ा खा के देखिये तो सही,
आशा को निराशा से जीता के देखिये तो सही

खुद को सफलता के तराजू में तौल के देखिये तो सही, 
पलडा हल्का लगे तो हर रोज़ कोशिश की एक बिंदी लगाइये तो सही
.
घर हो या बाहर, खुद को एक उड़ान भरने तो मौका  दीजिये ना भई, 
चूड़ी की खनक में सपनों का साज थिरकने तो दीजिये

गालों की लाली को मुस्कान में डुबो के देखिये तो सही,
झुरियों की ओट से झांकती गुड्डी को पहचानिये  तो सही. 

बांधनी की ओढनी से मुश्किलों को झाड़िए तो सही,
बेबाक जोश की झुमकी को तनिक इत्र में महकाइए तो सही.

खुद के लिए भी तो एक पल जी के देखिये तो सही,
आज अपनी ही प्रेरणा बन के देखिये तो सही.

हैप्पी विमेंस डे 
८ मार्च , २०१४ 


3 comments:

  1. सरल भाषा में एक सुन्दर एवं भावपूर्ण लेखन। मै पहले भी यह बात कह चूका हूँ की आप अंग्रेजी में बहुत अच्छा लिखते हैं, परन्तु मुझे आपकी हिंदी की रचनाओं की प्रतीक्षा रहती है :) लिखते रहिये।

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    1. धन्यवाद पाण्डेय जी, मैं खुद हैरान हूँ की मैं हिंदी में कैसे लिख लेती हूँ ? कभी भूले भाले अंग्रेजी की पोस्ट्स पर भी कृपा कर दीजिये , इतनी भी पराई नहीं है ;)

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    2. हा हा :) आपको तो मेरी आंग्ल भाषा पर पकड़ पता ही है, public health का काम चल जाता है, साहित्य में पकड़ थोड़ी कमजोर हो जाती है :)) वैसे भी अपने को भोजपुरिया अंग्रेजी ज्यादा आती है। पर मै आपके करीब-२ सारे पोस्ट पढ़ता हूँ भाषा पर ध्यान दिए बिना। आप तो सलेब्रिटी राइटर हो :))

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