15/07/2014

नानी ओ नानी, सुनो मेरी कहानी / Nani O Nani, Suno Meri Kahani

When wife's parents visit during SALE SALE SALE, the husband is not happy specifically or generally, whichever ways. All they could see is wrong timing and a big credit card bill. Because now they have to match the standards of their father-in-law, be it managing chores, shopping, traveling, knowledge about finance, share market, current affairs etc etc.

On top of that, a shopaholic wife and mother-in-law !
Inspired from one such extravagant evening to a mall, dedicating this poem on behalf of my daughter to her Naani and plight of a husband, father and son-in-law under pressure.


Sanvi's first hand bag, gifted by her Naani when
she was just 4 months, March 2013.
नानी ओ नानी
सुनो मेरी कहानी

यह जो आपकी है ना, बिटिया पुरानी
खुद को समझे बड़ी सयानी
लो, कल का ही किस्सा सुनती हूँ
फिर मत कहना, ख़ामख़ा मैं गप्पे लड़ाती हूँ

आपने मन की सयानी
सुबह पढ़  रही थी, पेज ३ के इश्तिहार
पढ़ के हो गई एकदम क्रेजी
बिलकुल रेडी जाने को तैयार

फटाफटी बना लिया शौपिंग का प्लान
बोली डैडी जी को कर लीजिये ना आज
वर्क फ्रॉम होम
बाहर जाने का हो रहा है बहुतै मन


डैडी जी बेचारे, हमारे "बेस्ट एम्प्लोयी" काम के मारे
बोले ले चलूँगा वीकेंड पे
कहाँ बेकार ही होगी आज परेशान ?
क्या लेनी है कोई अर्जेंट चीज़ मेरी जान ?

आपकी बिटिया ने एक न सुनी डैडी जी की
बोली ! ऐ जी क्या कहते हैं ?
तब तक तो हो जायेंगे, सारे साइज़ और कलर्स ख़तम
मत करो इस स्टे-ऐट-होम मॉम पे यह सितम

डैडी जी बोले, देखो सोना की अम्मा
कनाडा वाले क्लाइंट ने दिया है बड़ा जिम्मा
आज जाना तो लग रहा है मुश्किल
सब्र रखो ! मुझे मत करो ऐसे पुश एंड किल

हुन्ह !

सड़ा सा  मुँह बना के आपकी बिटिया गई बिगड़
क्यूंकि
डैडी जी ने दबा दिया था
गलती से गुस्से वाला ट्रिगर

जैसे तैसे भैया सुबह की चाय बनी
पीते वक्त दोनों को ही  मिठास खली
हमें तो आ रहे थे बहुतई मजे
चुप-चाप मौके पे अपनी गुड़िया के साथ थे सजे

कुछ देर बाद संभल के बोली मेरी माता
क्यूँ नहीं एक बार अकेले सेल घूम आऊँ
फिर बाद मैं वीकेंड पे
सिलेक्शन के लिए आपको ले जाऊँ

पिता श्री ने मन  ही मन याद किया एपिसोड पुराना
कहीं फिर न हो जाए शुरू
उनकी भाग्यवान
लेकर अपने पिताजी के शौपिंग का जमाना

कुछ देर बाद बोले हम्म्म
अपने सिग्नेचर स्टाइल
और हमारी माता जी ने तुरंत की डिलीवर
वड्डी वाली स्माइल

नानी ओ नानी !

अब यह न पूछना 
कित्ते का आया बिल ?
नहीं तो फिर बैठ जाएगा 
आपके मेहमान का दिल

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10 comments:

  1. Itna sitam....mummy ki shopping ke liye papa ka work from home. Ye jo sale sale ki bahaar aayi hai machi har ghar main khoob ladaai hai.
    Very hilarious.

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    1. Anu ji aapne bhi mast tukbandi ki hai.

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  2. Loved the mathura tinge in the language, true scene...

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    1. Its not brij, the words are picked from Allahabadi dialect.

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  3. This was truly fun ... bahut maza aaya padhke :-)

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    1. Heheh, when i re-read it, i am enjoying it more than writing :p

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  4. Very nice! Ghar ghar ki kahani!

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    1. Thanks Ratna for dropping by. I remember reading your blog sometime back. How are you?

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  5. हा हा हा, आपके ऐसे ही एक पोस्ट की प्रतीक्षा थी :-) बहुत ही खूबसूरत। बिल का अंदाज़ा लगाने की जरूरत नहीं है, बस पतिदेव की एक फोटो लगा दीजिये उस दिन की ;)) आपका अंग्रेजी और हिंदी दोनों में लिखने का अंदाज़ काफी निराला है। लिखते रहिये

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    1. धन्यवाद पाण्डेय जी. व्यंग एक ऐसा तीर है तो अक्सर निशाने पे लगता है और बात भी बन जाती है. सही कहा ना. और प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार, कमेंट्स लिखने मैं पाठक पता नहीं क्यों कंजूसी करते हैं.

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