04/02/2014

दादी बाबा तुम जल्दी आना / Dadi Baba Tum Jaldi Aana

आज से एक साल पहले
१६  फ़रवरी , २०१३ : मेरी और दादी बाबा की पहली रेल यात्रा,
राजधानी ट्रैन से दिल्ली। फिर वहाँ से मथुरा -पटना -दिल्ली-बैंगलोर हवाई । 
#Toddlers Tuesday


दादी तुम क्यूँ चली गई वापस अपने घर
मुझे यों अकेला छोड़ कर
सोना सोना करके गूंजता था इस घर का आँगन
अब सन्नाटे से फिर भर जायेगा ये अपार्टमेंट

अब कौन करेगा संग मेरे हंसी ठिठोली
कौन संवारेगा मेरे बाल और खेलेगा आँख मिचोली
कौन करेगा मेरे गुड्डे गुड़िया का ब्याह
अब किसकी ऐनक लेकर घुटने चल चली जाऊं मैं

कौन बैठेगा घंटो मुझे तकता हुआ
चाहें भोर हो या लगा हो रैन बसेरा
कौन बतायेगा दिनचर्या मेरी अब पापा को
फिर कौन कहेगा हो गई रात , अब रानी बेटी तू सो


दादी बाबा बस तुम्हारे ही बहाने ,



बन जाते थे मम्मी पापा भी फिर बच्चे
क्या तुम्हे नहीं लगते वो दोनों ऐसे ही अच्छे
मम्मी नहीं थकती थी सुनते पापा के बचपन के किस्से
और तुम नहीं थकती थी बांटते अपने दिल के वो संजोये हिस्से

जब मुझे खाना खिलाने में हो जाती मम्मी परेशान
तो तुम्ही न समझाती कि बच्चा पोसना नहीं आसान
कौन अब समझायेगा कि मत करो बच्चे से ऐसे  डांट फटकार
वो निरमोही तो बस और बस चाहे अपने माँ बाप का समय और प्यार

हैं कई नये रंगबिरंगे महंगे खिलोने मुझमे शामिल
प्ले ग्रुप भी होगा आगे चल कर, पर कोई न होगा तुमसा काबिल
क्यूँ है मुझे चुनना कि ले लो अपने
चाहें  मम्मी पापा या दादी बाबा

दादी तुम क्यूँ चली गई वापस अपने घर
मुझे यों अकेला छोड़ कर

क्या यह नहीं है तुम्हारे अपने बौआ का घरोंदा
फिर काहे नहीं भूल पाती तुम अपना वो पुराना बिछोना
लगता है पुरानी यादों का है उस पटना के घर मे डेरा
पापा बुआ चाचा का जहाँ हुआ है हर रोज़ सवेरा

क्यूँ पढाई कराई तुमने पापा को इन्नी ढेर सारी
कि भूल गए तो अपने छोटे शहर की पुरानी यारी
अब क्यूँ जाते वखत इति करती हो, रुंध जाता है गला अक्सर
तुम्ही ना चाहती थी मोनू बने बहुत बड़ा अफसर

चलो मत करो अब मुझे इतना भी याद
नहीं तो फिर छलक जायेगा वही पुराना साज़
दादी बाबा देखो आप दोनों जल्दी फिर से चल चले आना
और सुनिये अगली' बार टिकवा जरा तबियत से ही कटाना

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Now onwards every Tuesday, the toddler in our house will communicate on behalf of The Sinhas at No. 302 . .
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21 comments:

  1. Thank you readers for making this number one post till date.

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  2. एक बच्चे कि भावनाओं को शब्दों से चित्रित करना - एक कठिन परन्तु सराहनीय प्रयास। आपने हिंदी में लिखा, पढ़ कर एक सहजता सहजता का अनुभव हुआ। लिखते रहिये और प्रसारित करते रहिये।

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    1. आपका बहुत आभार पाण्डेय जी, विशेषकर हिंदी मे संवाद करने के लिये।
      आशा करते हैं कि आपको ब्लॉग पसंद आयेगा।

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  3. Good one !

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  4. Shrinivas SawantMay 11, 2014

    Is this yours??? Great!!!!!!!!

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    1. Thanks everybody. Shrinivas ji aapko shak bhi kaise hua. I am hurt.

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  5. Bhavana PandeMay 11, 2014

    Speechless!! its so emotional!

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  6. Sachin SinhaMay 11, 2014

    I am sure Sanvi wud be proud of this.

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  7. Shrinivas SawantMay 11, 2014

    Are Shak nahi, Itana accha hindi. I know your talent but ye language main bhi itna acha. Apako to media main career karna chahiye tha ye kaha aa gaye aaap. Mera hindi maf karna !

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    1. Shrinivas ji, aap shayad bhool gaye i am from bhaiya's land, proud UPite ;p and Bihari too.

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  8. Rashmi SrivastavaMay 11, 2014

    Shweta..u have a comment from Sinha ji that speaks it all about the post

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  9. Rajeev Kamal KumarMay 11, 2014

    bahut barhiya, excellent shweta

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  10. Sandeep KulshreshthaMay 11, 2014

    Wah! Kya likha hai!

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  11. Namita BhardwajMay 11, 2014

    Really awesome mam.....

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  12. Sandeep ChooramaniMay 11, 2014

    awesome!!

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  13. Shefali SinhaMay 11, 2014

    Superbb 2 gud .!!!

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  14. Deepika YadavMay 11, 2014

    so emotional , loved it

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  15. Gagan ChooramaniMay 11, 2014

    Superb sis....

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  16. Chetna SoodMay 11, 2014

    Sanvi emotions are being expressed just so right by her mother,this is why we say mother is only person in the world who does not need words from child to understand the feelings,she just knows it all!!!! Hail Moms!!!!

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  17. Prerna SinghMay 11, 2014

    Awesome stuff...!!

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